श्रवणी उपाक्रम / श्रावणी उपाकर्म* ब्राह्मणों का सबसे बड़ा वार्षिक वैदिक संस्कार का आयोजन कवर्धा ब्राम्हण समाज द्वारा है।

*श्रवणी उपाक्रम / श्रावणी उपाकर्म* ब्राह्मणों का सबसे बड़ा वार्षिक वैदिक संस्कार है।
यह सिर्फ जनेऊ बदलने की रस्म नहीं है, इसके 4 मुख्य अंग हैं:
*प्रायश्चित, संकल्प, संस्कार और स्वाध्याय*
क्या होता है इसमें?
1. *अर्थ:* ‘श्रावणी’ यानी श्रावण मास और ‘उपाकर्म’ यानी समीप जाकर वेद अध्ययन की फिर से शुरुआत करना।
2. *उद्देश्य:* साल भर में जाने-अनजाने हुई गलतियों का प्रायश्चित, आत्मशुद्धि और सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त करना।
3. *विधि:* यह नदी या सरोवर के किनारे सामूहिक रूप से होता है।
– हेमाद्रि स्नान, पंचगव्य (गौ-दुग्ध, दधि, घृत, गौमूत्र, गोबर) से स्नान और पान
– 8 तरह के द्रव्यों – पंचगव्य के अलावा कुशा, दुर्वा, अपामार्ग (चिड़चिड़ा), भस्म आदि से दशविध स्नान
– सूर्योपासना, सप्तऋषि पूजन, देव-ऋषि-पितृ तर्पण
– पुराना यज्ञोपवीत (जनेऊ) त्याग कर नया अभिमंत्रित जनेऊ धारण करना
– जाने-अनजाने पापों के लिए क्षमायाचना
कब होता है?
प्रत्येक वर्ष *श्रावण शुक्ल पूर्णिमा* को।
– यजुर्वेदी – श्रावण पूर्णिमा को
– ऋग्वेदी – श्रावण मास में श्रवण नक्षत्र में
– सामवेदी – भाद्रपद में हस्त नक्षत्र में 9ffa
श्रवणी उपाक्रम मे लगने वाले समस्त पूजा सामग्री कि व्यवस्था ब्राह्मण समाज कवर्धा के द्वारा किया जाएगा।
इस साल 2026 में यह 28 अगस्त* को है।ब्राम्हण समाज कवर्धा मे मानसरोवर वार्ड नंबर 3 मे मनाया जाएगा। कवर्धा ब्राह्मण समाज अध्यक्ष बंटी तिवारी एवं सचिव सुरेश शर्मा के द्वारा ब्राह्मण समाज के सभी से अनुरोध है कि अधिक से अधिक संख्या मे उपस्थित होकर श्रवणी उपाक्रम कार्य मे अपनी सहभागिता निभाने का निवेदन किया गया है।
मान्यता है कि इसी दिन भगवान विष्णु ने हयग्रीव अवतार लेकर वेदों का उद्धार किया था, इसलिए इसे वेद अध्ययन शुरू करने का सबसे श्रेष्ठ दिन माना जाता है। तमिलनाडु में इसे *अवनी अवित्तम* कहते हैं।
विनीत
ब्राम्हण समाज कवर्धा



