ब्राह्मण समाज कवर्धा द्वारा परशुराम जन्मोत्सव एवं उपनयन (जनेऊ ) संस्कार का आयोजन हुआ
कवर्धा – आज अक्षय तृतीया के पावन पर्व पर ब्राह्मण समाज कवर्धा द्वारा सामुहिक व्रतबंध संस्कार कार्यकम छप्पन भोग रेस्तारेंट में आयोजन किया गया था जिसमें कार्यकम का विवरण इस प्रकार है वैशाख शुक्ल प्रतिप्रदा,दिनांक 18 अप्रैल शनिवार को मन्दपाच्छादन,वास्तुपूजन ,हरिद्रालेपन ,शिक्षा दीक्षा एवं मातृकापूजन एवं वैशाख शुक्ल पक्ष द्वितीया तिथि दिनांक 19अप्रैल 2026को रविवार को व्रतबंध (जनेऊ)संस्कार का कार्यक्रम सम्पन्न हुआ तत्पश्चात बटुको की शोभायात्रा निकाली गई जो कि प्रमुख मार्ग से होते हुए माँ दुर्गा मंदिर(लोहारा रोड) पहुंची जहाँ विधिविधान सेमाता जी का पूजा-अर्चना किया गया जिसमें बड़ी संख्या में ब्राह्मण समाज गणमान्य लोग उपस्थित थे। कुल 12 बटुको का उपनयन (जनेऊ)संस्कार किया गया है वे निम्नलिखित है (1)रामेश्वर/कमलेश तिवारी (2)हर्षित/प्रशांत शर्मा (3)कृतज्ञ/कैलाश शर्मा (4)कृतार्थ/कैलाश शर्मा (5)सौम्य/राकेश तिवारी (6)अमित पांडेय कवर्धा(7)पवन/अखिलेश तिवारी (8)हर्ष/कमलेश तिवारी (9)अनमोल/रमेश शर्मा (10)आशु/कृष्णकान्त शर्मा (11)मृत्युजय/सूरज दूबे (12)अनुराग/राजू पाण्डेय।कार्यकम में आचार्य पंडित बिसाहू प्रसाद पांडेय,ओंकार प्रासाद दूबे ,एवं संतोष कुमार शर्मा थे । साथ ही साथ सांसद निधि से निर्मित अतिरिक्त कक्ष निर्माण का लोकार्पण एवं विप्रभवन का उन्नयन कार्य का माननीय सांसद लोकसभा क्षेत्र
राजनांदगाँव , संतोष पांडेयजी के करकमलों द्वारा सम्पन्न हुआ ।उक्त अवसर पर ब्राह्मण समाज के अध्यक्ष मनीष बंटी तिवारी,उपाध्यक्ष वेदनारायण तिवारी,महिला अध्यक्ष मधु तिवारी युवा अध्यक्ष डां आनंद मिश्रा,कोषाध्यक्ष सुद्धू तिवारी,सचिव सुरेश शर्मा,उमंग पांडेय,टीआर तिवारी, विसाहू प्रसाद पांडेय,आनंद मिश्रा (बुक डीपो )नंद कुमार शर्मा (मिडिया प्रभारी)किर्ता तिवारी,बिन्नू तिवारी,प्रभाकर शुक्ला,दीपक तिवारी,संतोष शुक्ला,राजेश पांडेय,टीपी दूबे,मेदिनी शंकर चौबे,रविन्द्र शुक्ला,हरि शुक्ला ,अश्वनी पांडेय,चंद्रशेखर शर्मा,भावेश मिश्रा ,किर्ता तिवारी,कीर्तन शुक्ला,उमेश पाठक,श्रीमति प्राची शुक्ला,अनिता तिवारी , संतोषी शुक्ला ,नीलिमा तिवारी,श्वेता तिवारी सुषमा शुक्ला,मंजूषा पांडेय,स्मृति पांडेय,आभा तिवारी अरूणा शर्मा ,सवी तिवारी,गीतांजली शर्मा के साथ साथ बड़ी संख्या में विप्र समाज के लोग उपस्थित थे ।*उपनयन* को *जनेऊ संस्कार* या *यज्ञोपवीत संस्कार* भी कहते हैं।
हिंदू धर्म के 16 संस्कारों में से ये 10वां और बहुत महत्वपूर्ण संस्कार है। इसे ‘दूसरा जन्म’ माना जाता है, इसलिए जनेऊ धारण करने वाले को ‘द्विज’ कहते हैं।
*1. उपनयन का मतलब क्या है?*
‘उप’ + ‘नयन’ = पास ले जाना।
यानी बच्चे को गुरु के पास, वेदों के पास, और ज्ञान के पास ले जाना। इस दिन से बच्चे का विद्यार्थी जीवन शुरू होता है।
*2. कब किया जाता है?*
– *ब्राह्मण*: 8वें वर्ष में
– *क्षत्रिय*: 11वें वर्ष में
– *वैश्य*: 12वें वर्ष में
– पुराने समय में सिर्फ इन तीन वर्णों का होता था। आजकल अमूमन 7 से 16 साल की उम्र के बीच कर देते हैं।
– मुंडन के बाद, शुभ मुहूर्त देखकर किया जाता है।
*3. मुख्य रस्में क्या होती हैं?*
– *मुंडन*: बाल उतारे जाते हैं – अज्ञानता त्यागने का प्रतीक।
– *स्नान*: पवित्र नदी या मंत्रों वाले जल से स्नान।
– *यज्ञोपवीत धारण*: 3 धागों वाला जनेऊ पहनाया जाता है। ये 3 धागे *देवऋण, ऋषिऋण और पितृऋण* के प्रतीक हैं। इसे बाएं कंधे से दाएं कमर की तरफ पहना जाता है।
– *गायत्री मंत्र*: गुरु बच्चे के कान में पहली बार गायत्री मंत्र देता है। इस दिन से उसे गायत्री मंत्र जपने का अधिकार मिलता है।
– *भिक्षाटन*: बच्चा पहली भिक्षा अपनी माँ से माँगता है – ‘भवति भिक्षां देहि’। ये अहंकार त्यागकर विनम्र बनने की सीख है।
*4. जनेऊ के नियम*
– मल-मूत्र त्याग के समय जनेऊ को दाएं कान पर लपेटते हैं, क्योंकि दायां कान पवित्र माना गया है।
– अगर जनेऊ टूट जाए या 6 महीने से ज्यादा पुराना हो जाए, तो बदलना चाहिए।
– इसे अपवित्र जगह पर उतारकर नहीं रखते।
*5. महत्व क्यों है?*
इस संस्कार के बाद बच्चा धार्मिक कार्यों, पूजा-पाठ और वेद अध्ययन का अधिकारी हो जाता है। ये बचपन से ब्रह्मचर्य bआश्रम में प्रवेश का प्रतीक है।
छत्तीसगढ़ में भी ये संस्कार खूब धूमधाम से होता है, खासकर ब्राह्मण परिवारों में। कवर्धा मे 19 अप्रेल 2026 को बहुत ही उत्साह से ब्राह्मण समाज द्वारा मनाया गया।



