कवर्धा

भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ी सीसी रोड! निर्माण के 18 दिन में ही जगह-जगह दरारें, साइड शोल्डर न बनने से ग्रामीणों में आक्रोश

भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ी सीसी रोड! निर्माण के 18 दिन में ही जगह-जगह दरारें, साइड शोल्डर न बनने से ग्रामीणों में आक्रोश

 

प्रधानमंत्री सड़क योजना के तहत पेंड्रीकला की बस्ती में निर्माणाधीन सड़क पर गुणवत्ता को लेकर गंभीर सवाल; ग्रामीणों ने घटिया निर्माण का आरोप लगाते हुए उच्चस्तरीय जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की

 

कवर्धा। प्रधानमंत्री सड़क योजना के अंतर्गत कोलेगांव से हथमुड़ी मार्ग से जुड़ी ग्राम पंचायत पेंड्रीकला की बस्ती अंदर में बन रही सीसी सड़क निर्माण की गुणवत्ता को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि निर्माण कार्य में निर्धारित मापदंडों की अनदेखी की जा रही है। सड़क निर्माण पूरा होने के महज 1 8 दिनों के भीतर ही जगह-जगह दरारें पड़ने लगी हैं। सड़क की हालत देखकर ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। उनका कहना है कि यदि निर्माण कार्य की शुरुआत में ही गुणवत्ता की निगरानी की गई होती, तो आज यह स्थिति निर्मित नहीं होती।

निर्धारित मोटाई को लेकर उठे सवाल

ग्रामीणों के अनुसार, सीसी सड़क की ढलाई कहीं 2 से 3 इंच तो कहीं लगभग 4 इंच तक की जा रही है। उनका आरोप है कि सड़क की मोटाई निर्धारित तकनीकी मापदंडों के अनुरूप नहीं है। हालांकि, सड़क की वास्तविक मोटाई और स्वीकृत मानक की पुष्टि तकनीकी जांच के बाद ही हो सकेगी।

ग्रामीणों का कहना है कि यह मार्ग गांव के आवागमन के लिए महत्वपूर्ण है। इसके बावजूद निर्माण कार्य में कथित अनियमितताओं पर समय रहते ध्यान नहीं दिया गया। अब सड़क में दरारें दिखाई देने से ग्रामीणों को भविष्य में आवागमन प्रभावित होने की चिंता सताने लगी है

 

निर्माण के कुछ ही दिनों में दरारें, गुणवत्ता पर सवाल

पेंड्रीकला की बस्ती के भीतर बन रही सीसी सड़क पर जगह-जगह दरारें दिखाई देने का दावा ग्रामीणों ने किया है। उनका कहना है कि सड़क निर्माण में उपयोग की गई सामग्री की गुणवत्ता, सीमेंट-रेत-गिट्टी के अनुपात और कंक्रीट की पर्याप्त तराई (क्योरिंग) को लेकर गंभीर लापरवाही बरती गई है।

 

ग्रामीणों के मुताबिक, सड़क निर्माण के बाद इतनी जल्दी दरारें पड़ना चिंता का विषय है। यदि समय रहते इसकी जांच नहीं कराई गई, तो बारिश और लगातार वाहनों के आवागमन के कारण सड़क की स्थिति और खराब हो सकती है। ग्रामीणों ने निर्माण कार्य की गुणवत्ता की स्वतंत्र तकनीकी जांच कराने की मांग की है।

 

साइड शोल्डर नहीं बनने से बढ़ा दुर्घटनाओं का खतरा

सड़क निर्माण के साथ दोनों ओर साइड शोल्डर यानी मिट्टी या मुरुम की पटरी का निर्माण नहीं होने की शिकायत भी सामने आई है। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क के किनारे ऊंचे और असमतल हो गए हैं। इससे दोपहिया वाहन चालकों को सड़क से नीचे उतरते समय परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

रात के समय पर्याप्त रोशनी नहीं होने पर यह समस्या और गंभीर हो सकती है। ग्रामीणों ने संबंधित विभाग से मांग की है कि सड़क के दोनों ओर आवश्यक साइड शोल्डर का निर्माण कराया जाए, ताकि आवागमन सुरक्षित हो सके।

 

ठेकेदार और संबंधित एजेंसी की भूमिका पर उठे सवाल

 

निर्माण कार्य की निगरानी और गुणवत्ता सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी संबंधित ठेकेदार तथा विभागीय तकनीकी अधिकारियों की होती है। ग्रामीणों का आरोप है कि सड़क निर्माण के दौरान निगरानी में लापरवाही बरती गई। उनका कहना है कि यदि समय-समय पर सड़क की मोटाई, सामग्री और निर्माण प्रक्रिया की जांच की जाती, तो कथित खामियों को शुरुआत में ही दूर किया जा सकता था।

 

हालांकि, सड़क निर्माण में भ्रष्टाचार हुआ है या नहीं, इसकी पुष्टि स्वतंत्र तकनीकी जांच, माप पुस्तिका, गुणवत्ता परीक्षण और विभागीय अभिलेखों की जांच के बाद ही हो सकेगी। ग्रामीणों ने इसी कारण पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।

 

ग्रामीणों ने दी चक्काजाम और आंदोलन की चेतावनी

सड़क की स्थिति से नाराज ग्रामीण बलराम चंद्राकर, राजेश चंद्राकर, शिवा तिवारी, विजय चंद्राकर, जय चंद्राकर, बसंत कुंभकार, विनोद कश्यप, राजेंद्र सहित अन्य ग्रामीणों ने प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि सार्वजनिक धन से बन रही सड़क का निर्माण यदि निर्धारित गुणवत्ता के अनुरूप नहीं होता है, तो इसका सीधा नुकसान आम जनता को उठाना पड़ता है।

ग्रामीणों ने मांग रखी है कि:

सीसी सड़क की मोटाई और निर्माण गुणवत्ता की उच्चस्तरीय तकनीकी जांच कराई जाए।

सड़क में पड़ी दरारों के कारणों का पता लगाकर दोषियों की जिम्मेदारी तय की जाए।

निर्माण कार्य में अनियमितता पाए जाने पर संबंधित ठेकेदार और जिम्मेदार अधिकारियों पर नियमानुसार कार्रवाई की जाए।

सड़क की आवश्यक मरम्मत कराकर दोनों ओर साइड शोल्डर का निर्माण कराया जाए।

निर्माण कार्य की गुणवत्ता जांच रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए।

ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जिला प्रशासन और संबंधित विभाग ने जल्द ही मामले का संज्ञान लेकर उचित कार्रवाई नहीं की, तो वे चक्काजाम और आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे। ग्रामीणों ने कहा कि सड़क की गुणवत्ता और सुरक्षा से समझौता किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा। अब देखना होगा कि संबंधित विभाग शिकायतों की जांच कर सड़क की वास्तविक स्थिति सामने लाता है या मामला कागजी कार्यवाही तक सीमित रह जाऐगा।

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