कवर्धा

9 अगस्त आदिवासी दिवस अपनी जड़ों से जुड़ें, शिक्षा से आगे बढ़ें, और एकता से भविष्य गढ़ें।”  – राजा खड़ग राज कुमार सिँह 

*9 अगस्त — विश्व आदिवासी दिवस / International Day of the World’s Indigenous Peoples*

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विश्व आदिवासी दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ

“अपनी जड़ों से जुड़ें, शिक्षा से आगे बढ़ें, और एकता से भविष्य गढ़ें।”  – राजा खड़ग राज कुमार सिँह

हर साल 9 अगस्त को पूरे विश्व में आदिवासी दिवस मनाया जाता है। इसे संयुक्त राष्ट्र ने 1994 में शुरू किया था, ताकि दुनिया भर के आदिवासी समुदायों के अधिकारों, संस्कृति और योगदान को याद किया जा सके।

 

9 अगस्त का महत्व

 

*1. पहचान और सम्मान*

दुनिया भर में 47 करोड़ से ज्यादा आदिवासी लोग 90 देशों में रहते हैं। इस दिन उनकी अलग भाषा, रीति-रिवाज, कला, संगीत और जीवनशैली को सम्मान दिया जाता है। भारत में हम इन्हें “आदिवासी” या “जनजाति” कहते हैं — जैसे गोंड, भील, संथाल, मुंडा आदि।

 

*2. अधिकारों की बात*

इस दिन UN और सरकारें आदिवासियों के जल, जंगल, जमीन के अधिकार, शिक्षा, स्वास्थ्य और आत्मनिर्णय के अधिकार पर चर्चा करती हैं। 2007 में UN ने “आदिवासी अधिकारों की घोषणा” भी इसी सोच के साथ पास की थी।

 

*3. प्रकृति से जुड़ाव*

आदिवासी समाज प्रकृति के सबसे करीब रहता है। जंगल बचाना, जैव विविधता, बीज संरक्षण, पारंपरिक दवाइयां — इन सब में उनका ज्ञान आज भी सबसे बड़ा है। जलवायु परिवर्तन से लड़ाई में उनका रोल बहुत अहम माना जाता है।

 

*4. भारत में खास महत्व*

भारत में आदिवासी आबादी करीब 10 करोड़ है, जो दुनिया में सबसे बड़ी है। छत्तीसगढ़, झारखंड, ओडिशा, मध्य प्रदेश में इनका बड़ा योगदान है। 9 अगस्त को स्कूलों, पंचायतों में प्रभात फेरी, नृत्य, गोंडी/भीली भाषा के कार्यक्रम और शहीदों को याद किया जाता है। बिरसा मुंडा, रानी दुर्गावती जैसे आदिवासी नायकों को भी इस दिन याद किया जाता है।

 

*5. थीम हर साल बदलती है*

UN हर साल एक थीम रखता है — जैसे “स्वैच्छिक अलगाव में रहने वाले आदिवासी”, “युवा और आत्मनिर्णय”। इसका मकसद नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ना है।

 

संक्षेप में

9 अगस्त सिर्फ एक तारीख नहीं है। ये याद दिलाने का दिन है कि विकास का मतलब सिर्फ शहर और टेक्नोलॉजी नहीं, बल्कि उन समुदायों को साथ लेकर चलना भी है जिन्होंने सदियों से जंगल और धरती को बचाकर रखा है।

 

कवर्धा जिला छत्तीसगढ़ मे लोहारा — राजा खड़ग राज सिंह द्वारा यहाँ गोंड और बैगा समुदाय की संस्कृति बहुत समृद्ध है। जिसे धूम धाम से मनाया जाएगा। सभी समाज की सहभागिता सदैव आदिवासी समाज पर बना रहेगा।

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